प्रेम धुन

प्रेमधुन लगी है तेरी !
मुझको जानेमन ओ मेरी !
आजा करले कुछ तो बाते प्यार की !

१.फिर कभी न आयेंगे ये दिन
कभी न आयेंगी ये राते फिर
कभी हां इंतजार की !

प्रेमधुन लगी है तेरी !
मुझको जानेमन ओ मेरी !
आजा करले कुछ तो बाते प्यार की !

२.फिर कभी न आएगा ये मौसम ए बहार !
फिर कभी न हो सकेगा हमको तुमको प्यार !
फिर कभी न गाएगी ये झुमके जमीं !
फिर कभी चमन में गुल खिलेंगे न हजार !!

प्रेमधुन लगी है तेरी !
मुझको जानेमन ओ मेरी !
आजा करले कुछ तो बाते प्यार की !

३.जिंदगी दो चार दिन की बस है चांदनी !
खिलखिला के हंस रही है देखो रागिनी !
जो मिले हैं दिन गुजर न जाएं वो कहीं ।
आजा खुल के जी लें सारे पल ये हमनशी !!

प्रेमधुन लगी है तेरी !
मुझको जानेमन ओ मेरी !
आजा करले कुछ तो बाते प्यार की !

४.दिल तड़प के नाम तेरा लेता है सनम !
एक बार नजर उठा के देखो कम से कम !
कदमों पे तुम्हारे जान रखदे हम अभी !
छोड़ेंगे न साथ तेरा हम जनम-जनम !!

प्रेमधुन लगी है तेरी !
मुझको जानेमन ओ मेरी !
आजा करले कुछ तो बाते प्यार की !

लेखक – विवेक शेलार.
Date- 08/ October/ 2020. Thursday.
Mb- 9893312811

आज की रात भी, बस यूं ही गुजर जाएगी



१.आज की रात भी, बस यूं ही गुजर जाएगी!
न तो तुम आओगे, और नींद भी न आएगी!!

२.हम भला किससे कहेंगे ये अपना हाले- बयां!
मरहम न देगी दुनिया, नमक ही लगाएगी!
आज की रात भी, बस यूं ही गुजर जाएगी!!

३.वो गली, कूचे,वो मंदिर,वो बाग और वो पहाड़!
वो रात एक, तेरे संग जो गुजारी थी।
वो एक रास्ता जो मेरे घर से तेरे घर तक था।
वो इक गलती जो मेरे दिल पे अब तक भारी थी!
बड़ी मुद्दत से कोशिश भूलने की करता हूं!
दिल से तेरी याद, बाद मरने के ही जाएगी!!

आज की रात भी, बस यूं ही गुजर जाएगी!
न तो तुम आओगे, और नींद भी न आएगी!!

Breakfast at my House

During the week we’re often walking out the door with a coffee in one hand and slice of toast in the other, but on weekends breakfast is never rushed. It’s a late affair, sometimes spilling over to lunch, with lots of reading and chatter in between courses of fruits, poached eggs, honey and toast. One of our favorite things we like to serve when friends are visiting are buckwheat blueberry pancakes.

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